वास्तविक भ्रस्टाचार मुक्त समाज की स्थापना

श्री अन्ना हजारे का अनशन हमें यह सिखा गया की हम भी यदि चाहें तो भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं.  एक आदमी की हिम्मत और सहस का पर्याय बन गए है अन्ना जी.  साथ में हमें यह भी सोचना होगा की क्या समाज में केवल इस प्रकार के आन्दोलन के जरिये ही बदलाव लाया जा सकता है.  क्या आपको यह नहीं लगता है की आज जो लोग अन्ना जी का साथ दे रहे हैं वह लोग कभी भी भ्रस्टाचार में लिप्त नहीं रहें है अथवा नहीं रहेंगे.  मैं जब देखता हूँ तो मुझे तो कुछ न कुछ कमी हम सभी में लगाती है.  भ्रस्टाचार तो केवल एक ही तरह से बंद हो सकता है जब हम घूस देना बंद कर दें.  यदि हम देना बंद कर देंगे तो लेगा कौन और मिलेगा भी किसे.  यह बात इसलिए भी बहुत जरूरी है की यदि जितने लोग भी श्री अन्ना जी का समर्थन कर रहे हैं यदि वह लोग कसम खा लें की हम अपना कोई भी कम करने के लिए अधिकारीयों को न तो कोई घूस देंगे और न घूश लेकर कोई काम करेंगे.  समझ लो बिना किसी मेहनत के ही और बिना किसी आन्दोलन के ही हम एक भ्रस्टाचार मुक्त समाज की स्थापना कर लेंगे. आप इस वहम में न रहिएगा की एक लोकपाल बिल के द्वारा समाज में व्याप्त भ्रस्टाचार ख़त्म हो जायेगा.  वह तो केवल और केवल तभी खत्म हो सकता है जब देश की जनता इस बात को ठान ले की हम न तो घूश लेंगे और न देंगे.  कम से कम मेरा तो यही मानना है.  हम सुधरेंगे जग सुधरेगा.